जन्माष्टमी का त्योहार 25 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार की जन्माष्टमी अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है और भगवान श्रीकृष्ण का जन्म लक्ष्मी योग में हो रहा है। इसलिए जन्माष्टमी का व्रत अमृत समान फल देने वाला होगा।
आचार्य सुधानंद झा ने बताया कि 25 अगस्त को जन्माष्टमी और 26 अगस्त को कृष्णाष्टमी का व्रत 24 घंटे का होगा। गुरुवार को सुबह से ही भक्त भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए मध्यरात्रि में उनके जन्म तक व्रत में रहेंगे। श्रीकृष्ण के जन्म के बाद व्रत करने वाले अगले दिन पारण करेंगे।
जन्माष्टमी में ये करें
जन्माष्टमी के दिन सुबह से ही व्रत और पूजा करें। सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण या शिव मंदिर में पूजा करें। दुर्गाजी की पूजा करें। शाम में दीप जलाकर आरती करें। हर तरह के फल, फूल और पूजन सामग्री के साथ रात दस बजे पूजा में बैठ जाएं। कृष्ण परिवार की पूजा करें। दसों दिशाओं के स्वामी, नवग्रह, गणेशजी और इंद्र देवता की पूजा करें।
प्राण प्रतिष्ठा 12 बजे
मध्य रात्रि में बारह बजे प्राण प्रतिष्ठा के व्रती फलों का प्रसाद ग्रहण करें। अन्न का प्रसाद सुबह में ग्रहण करें। जन्माष्टमी का मकसद पारिवारिक समृद्धि है। कर्म का उपदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय का योग अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में पड़ रहा है।