जो निकले दर्द दिल के काफिलों से मेरी जा हो जा रुखसत साहिलों से amol di se

जो निकले दर्द दिल के काफिलों से
मेरी जा हो जा रुखसत साहिलों से

वो तन्हा होके भी तन्हा कहाँ है
जिसे आता है जुड़ जाना दिलो से

सफ़र दिलवक नहीं होता कदम भर
तू मिलना मुझसे लेकिन सिलसिलों से

मैं कितनी रात जागा मुझसे पूछो
न पूछा कीजिये इन महफ़िलो से

मेरा वो कत्ल करके रो रहे है
मै जिन्दा हूँ ये कह दो कातिलो से

यक़ीनन वो अमोल खुदगर्ज़ होंगे
है जिनका वास्ता बस  काबिलो से
                       🌹अमोल🌹

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